महुआ के अचार और शहद से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर…

मोहला 23 जुलाई 2026। जिले के मोहला विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम रामगढ़ से महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित माँ रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने महुआ के अचार एवं शहद निर्माण को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन तथा बिहान योजना के तहत समय पर मिली वित्तीय एवं तकनीकी सहायता से समूह की महिलाएं आज सफल उद्यमी बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।


कभी आर्थिक तंगी और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली इस समूह की 10 महिलाओं ने संगठित प्रयासों से अपनी मेहनत को नई दिशा दी। पिछले एक वर्ष से महुआ का अचार और शहद तैयार कर उनका विक्रय किया जा रहा है। इस अवधि में समूह ने अपने उत्पादों के निर्माण एवं विक्रय से लगभग 1 लाख रुपये की आय अर्जित की है।

यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती उद्यमशीलता का भी प्रमाण है। समूह से होने वाली नियमित आय ने सदस्यों के परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। समूह की सदस्य श्रीमती सुशीला कुरेटी बताती हैं कि पहले उन्हें घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज वे आत्मनिर्भर हैं।

अब वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा, परिवार की जरूरतों की पूर्ति तथा घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान भी दिया है।


रामगढ़ गांव की यह पहल पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का सफल उदाहरण बनकर उभरी है। जिला प्रशासन एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी समन्वय से दूरस्थ वनांचल की महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका का अवसर मिला है।

माँ रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार और समूह आधारित उद्यमों से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।