
मजदूर नेता और समाजवादी आंदोलन के प्रखर योद्धा के 100वें जन्मदिवस पर किया गया स्मरण

राजनांदगांव। राजनांदगांव के प्रथम विधायक, मजदूर नेता एवं समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता स्वर्गीय जे.पी.एल. फ्रांसिस की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके योगदान और जनसेवा को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फ्रांसिस परिवार की ओर से उनकी जन्मशती के अवसर पर शासकीय प्राथमिक शाला डुमरडीह खुर्द के बच्चों को स्वल्पाहार भी कराया गया।
स्वर्गीय जे.पी.एल. फ्रांसिस का पूरा नाम जोसफ पीटर लिओ फ्रांसिस था। उनका जन्म 9 सितंबर 1925 को चंद्रपुर, महाराष्ट्र में हुआ था। पिता के निधन के बाद वे अपनी माता और भाई-बहनों के साथ राजनांदगांव आए। वर्ष 1950-60 के दशक में उन्होंने राजनांदगांव की बीएनसी मिल के मजदूरों के बीच सक्रिय होकर उनका नेतृत्व किया। बाद में उन्होंने मिल की नौकरी छोड़कर समाजवादी पार्टी से जुड़कर राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन की शुरुआत की और राजनांदगांव के प्रथम विधायक निर्वाचित हुए।
विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र में तालाब निर्माण, नल-जल योजनाओं, रोजगार तथा जनहित से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए प्रयास किया। जरूरतमंद लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते थे। बताया जाता है कि वे जरूरतमंद लोगों की आर्थिक मदद करने के साथ ही बाहर से आने वाले लोगों को यात्रा खर्च देकर और भोजन कराकर विदा करते थे। गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए कॉपी, पेन और किताबें उपलब्ध कराने में भी वे सहयोग करते थे।
उनके सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनके मित्रों एवं सहयोगियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय मोतीलाल वोरा, स्वर्गीय मदन तिवारी, स्वर्गीय रज्जूलाल पांडे सहित कई समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोगों के साथ उनके घनिष्ठ संबंध रहे। तुलसीपुर स्थित उनके निवास पर अक्सर राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों पर चर्चा के लिए लोगों का जमावड़ा लगा करता था।
सादगी और सेवा भाव के लिए रहे यादगार
जे.पी.एल. फ्रांसिस अपने सरल, सहज और विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते थे। विधायक रहते हुए शासकीय कार्यों के लिए उन्हें भोपाल की यात्राएं करनी पड़ती थीं। उन्हें शासन की ओर से रेलवे का प्रथम श्रेणी पास और हवाई यात्रा की सुविधा मिलती थी, लेकिन वे सामान्य नागरिक की तरह यात्रा करना पसंद करते थे और हवाई यात्रा के टिकट का स्वयं उपयोग नहीं करते थे।
वे हमेशा सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांतों पर चलते रहे। उनका मानना था कि जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है और वे जनता के सेवक हैं। वे ईमानदारी को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानते थे और अपने परिवार तथा परिचितों को भी हमेशा ईमानदारी से जीवन जीने की प्रेरणा देते थे।
धार्मिक और मानवीय मूल्यों से जुड़ा जीवन
फ्रांसिस की दिनचर्या अनुशासित थी। वे सुबह प्रार्थना करते और इसके बाद समाचार पत्र पढ़ते थे। उन्हें विभिन्न धर्मों के धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान था तथा रामायण सहित धार्मिक आयोजनों में भी वे रुचि लेते थे। बच्चों के प्रति उनका विशेष स्नेह था। वे अपने घर आने वाले बच्चों को मिश्री बांटकर खुश होते थे। परिवार में उन्होंने बेटी और बहू के बीच कभी भेदभाव नहीं किया।
उनका विवाह मोनिका फ्रांसिस से हुआ था। उनके एक पुत्र रॉबिन फ्रांसिस और दो बेटियां सम्मू फ्रांसिस एवं नोरा फ्रांसिस हैं। परिवार में पोते-पोतियों और नाती-नातिन के साथ भी उनका स्नेहपूर्ण संबंध रहा।
13 मई 2013 को उनके निधन से राजनांदगांव ने एक सरल, ईमानदार और संघर्षशील जननेता को खो दिया। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके तुलसीपुर स्थित निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उनके पुराने मित्र स्वर्गीय मोतीलाल वोरा सहित तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, प्रभारी मंत्री राजेश मूणत तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
स्वर्गीय जे.पी.एल. फ्रांसिस की 100वीं जन्मशती पर परिवार एवं शुभचिंतकों ने उनके जीवन, विचारों और जनसेवा के कार्यों को याद करते हुए उन्हें शत-शत नमन किया। इस अवसर पर जरूरतमंद एवं स्कूली बच्चों के साथ खुशियां साझा करते हुए उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाने का संदेश भी दिया गया।











































