back to top

राजनांदगांव : कैदियों का जेल में मौत होने पर परिवार को मिलेगा मुआवजा…

DEMO PHOTO

Advertisements

राजनांदगांव – जिसके तहत यदि जेल में किसी कैदी की मौत हो जाती है तो उसके परिजनों को साढ़े सात लाख रुपए मिलेंगे। यह नीति एनएचआरसी के निर्देश पर तैयार की गई है। मौत होने के बाद जेल के अधीक्षक के द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उस रिपोर्ट को सरकार की मंजूरी के बाद मुआवजे की रकम कैदी के परिजनों को मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के जेल विभाग ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के निर्देश पर नई नीति बनाई है। जिसके तहत जेल में किसी कैदी की मौत होने पर उसके परिजनों को मुआवजा दिया ।

जाएगा, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की गई है। जेल में कैदियों के आपसी लड़ाई-झगड़े में या फिर जेल कर्मियों की प्रताड़ना से हुई मौत पर ही मुआवजे की रकम मिलेगी। मौत के बाद परिजनों को देने के लिए 7 लाख 50 हजार रुपए मुआवजा तय किया गया है। नई नीति के अनुसार बीमारी सहित प्राकृतिक मृत्यु के मामले में मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इसी तरह अप्राकृतिक मृत्यु मामलों में मुआवजा नहीं दिया जाएगा। जेल से भागने के दौरान अगर मौत हो जाती है तो मुआवजा नहीं मिलेगा। यदि किसी प्राकृतिक आपदा और विपत्ति के कारण मौत होने पर भी कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।

आपसी झगड़े में मौत पर भी मुआवजा

यदि जेल के बंदी की मौत आपसी झगड़े, जेल स्टॉफ द्वारा प्रताड़ना या मारपीट किए जाने पर होती है तो साढ़े 7 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा। वहीं मौत जेल अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या उदासीनता व चिकित्सा अधिकारियों या पैरा मेडिकल स्टॉफ की लापरवाही के कारण इलाज के दौरान मृत्यु होती है तो 5 लाख रुपए दिए जाएंगे। बंदी यदि जेल प्रशासन की प्रताड़ना से व्यथित होकर आत्महत्या कर लेता है तो परिजनों या कानूनी उत्तराधिकारियों को 5 लाख रुपए दिए जाएंगे।

Advertisements

You cannot copy content of this page