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राजनांदगांव: नीता, शशिलता और यामिनी के जीवन में वीबी-जीरामजी योजना बनी आर्थिक संबल…

बढ़े श्रम दिवस और मजदूरी दर से ग्रामीण परिवारों को मिली नई मजबूती

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राजनांदगांव 09 जुलाई 2026। विकसित भारत-जीरामजी (वीबी-जीरामजी) योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत रोजगार के अवसरों का विस्तार करते हुए श्रम दिवस 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिए गए हैं।

 साथ ही दैनिक मजदूरी दर 261 रूपए से बढ़ाकर 300 रूपए किए जाने से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम फरहद की श्रमिक महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

श्रीमती नीता साहू बताती हैं कि वे पहले रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य करती थी और वर्तमान में वीबी-जीरामजी योजना में कार्यरत हैं। पहले उन्हें 100 दिनों तक रोजगार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। वहीं दैनिक मजदूरी 261 रूपए से बढ़ाकर 300 रूपए कर दी गई है। 

इससे परिवार के दैनिक खर्चों के साथ बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी सुविधा मिल रही है। उन्होंने इस जनहितकारी निर्णय के लिए केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इसी तरह श्रीमती शशिलता यादव ने बताया कि वीबी-जीरामजी योजना के कारण ग्रामीण श्रमिकों को पहले की अपेक्षा अधिक रोजगार मिल रहा है।

 रोजगार अवधि बढऩे और मजदूरी दर में वृद्धि से परिवार की आय में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आय से घर की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और सभी मजदूरों में खुशी का माहौल है। उन्होंने शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं निरंतर संचालित होती रहनी चाहिए।   
 
ग्राम फरहद के श्रीमती यामिनी साहू ने बताया कि वे भी पहले रोजगार गारंटी योजना में कार्य करती थी और अब वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि श्रम दिवस बढऩे और मजदूरी दर में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। अतिरिक्त आय से घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन हो रहा है तथा परिवार को आर्थिक सुरक्षा का एहसास हुआ है। 

उन्होंने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। वीबी-जीरामजी योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी आय बढ़ाकर जीवन स्तर में सुधार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 

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