
राजनांदगांव- शहर के डाकलिया परिवार के सभी छह सदस्यों के साथ कोडागांव की सुशीला देवी सहित शहर के स्व. रतन लूनिया की धर्म पत्नि ने सांसरिक मोहमाया का त्याग कर अध्यात्म की ओर अग्रसर होते हुए विधिवत जैन साधु-साध्वी की दीक्षा ली है। राजनांदगांव शहर के स्थानी जैन बगीचा में श्री जिन पीयूषसागर सूरीश्वरजी की उपस्थिति में दीक्षा कार्यक्रम संपन्न हुआ।
राजनांदगांव शहर में 27 जनवरी गुरुवार का दिन जैन समाज समाज के लिए ऐतिहासिक महत्व और खुशियों वाला रहा। राजनांदगांव शहर के जैन बगीचा में पहली बार एक ही परिवार के सभी छह सदस्सों के साथ अन्य दो लोगो ने जैन साधु- साध्वी की दीक्षा ग्रहण की है। अब ये सभी मुनि साधू -साध्वी के रुप धर्म की अलख जायेगे।

डाकलिया परिवार के माता-पिता ने अपने दो पुत्र और दो पुत्रियों सहित सांसारिक मोहमाया का त्याग कर अध्यात्म की राह अपना ली है। मुमुक्षुभूपेंद्र डाकलिया, उनकी धर्मपत्नी मुमुक्षु सपना डाकलिया, पुत्र मुमुक्षु देवेंद्र एवं मुमुक्षु हर्षित डाकलिया तथा दोनों पुत्रियां मुमुक्षु महिमा व मुमुक्षु मुक्ता डाकलिया और कोंडागांव की मुमुक्षु संगीता गोलछा, राजनांदगांव की मुमुक्षु सुशीला लूनिया ने श्री जिन पीयूषसागर सूरीश्वर जी म.सा. की मौजूदगी में दीक्षा ग्रहण की। इस क्षण के साक्षी बनने बडी़ संख्या में जिले भर के जैन समाज के लोग शामिल हुए। दीक्षा ग्रहण करने से पूर्व दीक्षार्थी उन्हें कहा कि दीक्षा का मार्ग सत्य और ईश्वर का मार्ग है, इसलिए वे इस मार्ग पर चल पड़े।

डाकलिया परिवार के सभी सदस्यों का बिनोली के बाद विधिवत रूप में दीक्षा संस्कारोपित प्रकिया हुई। सभी ने आचार्य पीयुष सागर जी महाराज के सानिध्य में जैन साधु-साध्वी की दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा समारोह को लेकर शहर के जैन बगीचे में जैन समाज के द्वारा व्यापक तैयारियां की गई थी। दीक्षा समारोह के आयोजन में देश प्रदेश सहित जिले भर से श्रद्धालु पहुंचे थे।










































