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सुकमा : लैखन और लच्छु मधुमक्खी पालन से कमाएंगे मुनाफा…

कृषि विज्ञान केन्द्र सुकमा जिले के कृषकों को मधुमक्खी पालन के सीखा रहा गुर
मधुमक्खी पालन अच्छी आमदनी का विकल्प

सुकमा 02 जून 2021शहद की खूबियां जगजाहिर है। शुद्ध शहद के स्वास्थ्य से जुड़े फायदों के लोग हमेशा से मुरीद रहे हैं। बाजारों में ग्रामीण अंचल में मिलने वाले शुद्ध शहद की मांग हर समय रहती है। सुकमा जिले मंे विभिन्न प्रकार के वनस्पति की भरमार है, जिसमें तरह तरह फूल, पेड़ आदि शामिल हैं। जिले में उपलब्ध वनस्पति विविधता मधुमक्खी के परागण के लिए अनुकुल है। साथ ही शुद्ध शहद की बढ़ती डिमांड और अच्छा मार्किट रिस्पांस को देखते हुए पाॅयलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले के कृषकों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षित कर इस कार्य मे दक्ष बनाया जा रहा है।
छिन्दगढ़ ब्लाक के ग्राम पुजारीपाल के कृषक लैखन कश्यप और लच्छु राम भोयर मधुमक्खी पालन को अतिरिक्त आय के जरिए के रुप में अपना रहें हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य में कृषि कार्य के अपेक्षा कम लागत और मेहनत हैै। मधुमक्खी के अच्छी देखभाल से वे अतिरिक्त आय अर्जित कर अपना आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकेगें।  

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शहद का सेवन करने से होते है बहुत से फायदे
 शहद में ग्लूकोन, विटामिन खनीज तथा अमीनो अम्ल होते है, जिसमें कई पौष्टिक तत्व मिलते है। जो घाव को ठीक करने और उत्तकों के बढ़ने के उपचार में बहुत फायदेमंद होता है। इनमें उच्च किस्म के जीवाणु रोधी क्षमता होती है तथा शहद के सेवन से बढ़ते वजन को संतुलित किया जा सकता है।
शहद उत्पादन के व्यवसाय से होगा सीधा लाभ
कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष चैरसिया ने बताया कि एकीकृत आदिवासी विकास योजना अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ग्राम पंचायत छिन्दगढ़ अंतर्गत ग्राम पुजारीपाल के कृषक लैखन कश्यप और लच्छु राम भोयर ने केवीके के तकनिकी मार्गदर्शन में मधुमक्खी पालन शुुरू किया है। चैरसिया ने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र और वन विभाग द्वारा संयुक्त रुप से मधुमक्खी पालन के लिए कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मधुमक्खी पालन से कृषकों को स्वालंबन की नयी राह मिलेगी।

कृषि कार्य के साथ इस कार्य में समय देकर वे अपने लिए अतिरिक्त आय का साधन सृजित कर सकते हैं। कृषकों को 5 पेटी हनी बी कॉलोनी, हनी बी हाइव एवं शहद निकालने के यंत्र के साथ-साथ अन्य सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, दस्ताने, स्मोकर, टॉप कवर प्रदाय किया गया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक पेटी से लगभग 15 लीटर शहद का उत्पादन अनुमानित है। बाजार भाव में शहद बेंचकर कृषक लगभग 30 हजार तक की आय अर्जित कर सकते हैं। समय के साथ मधुमक्खियों के संख्या में वृद्धि होने पर शहद उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ेगा। सुकमा जिले में किसानों के आर्थिक संबल के लिए की गई अभिनव पहल के तहत दर्जन भर आदिवासी किसानों को लाभ मिलेगा। प्रारंभिक स्तर पर सफल क्रियान्वयन के पश्चात् मधुमक्खी पालन को व्यापक स्तर पर किए जाने की तैयारी है। जिले के किसानों को मधु क्रांति से जोड़कर आर्थिक संबल देने के लिए निरंतर इसके लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

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