राजनांदगांव: देवउठनी एकादशी पर बाजारों में लौटी रौनक छोटी दीवाली की तैयारियां जोरों पर…

राजनांदगांव। दीवाली पर्व के हफ्ते भर बाद अब छोटी दीवाली का उल्लास बिखर रहा है। देवउठनी को लेकर बाजार में एक बार फिर रौनक लौट आई है। गन्नों के अलावा पटाखे, पूजन सामग्री व मिठाइयों की बिक्री हो रही है। सर्राफा में भी रौनक सजाया जाएगा फिर तुलसी-विष्णु के दिख रही है। शाम को घर-घर गन्ने का विवाह की रस्म पूरी की जाएगी। देवउठनी के साथ ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों का दौर शुरू हो जाएगा।

नवंबर में ही सर्वाधिक शादियां हैं। के दिन हरि 12:55 बजे व्रत 2 नवंब नवंबर की रहेगा। देवउठनी को छोटी दीवाली के रूप में मनाते हैं। छोटी दीवाली की तैयारी शुरू हो चुकी है। बाजार में रौनक लौट आई है। इस पर्व पर गने का काफी महत्व रहता है। कवर्धा के अलावा अन्य दूसरे शहरों के थोक के भाव में गन्ने पहुंचे हैं। 60 रूपये से 100 रूपये जोड़ी में गन्ने बिक रहे हैं। गन्नों के साथ ही पूजन सामग्री एवं मिठाइयों की भी मांग है। कहीं-कहीं पटाखे भी बिक रहे हैं। शाम में तुलसी विवाह की मान्यता है। घर-घर प्रतीक रूप में तुलसी विष्णु के विवाह की रस्म पूरी होगी। विवाह के साथ मांगलिक कार्यों का दौर शुरू हो जाएगा। हिंदू पंचांग में देवउठनी एकादशी का खास महत्व है।

कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। यही वजह है कि इसे प्रबोधिनी एकादशी या देवउठान एकादशी भी कहा जाता है। भगवान के जागते ही चातुर्मास का समापन हो जाता है और सभी शुभ-मांगलिक कार्यों की शुरुआत फिर से होने लगती है। इस साल देव उठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। एकादशी का पारण समय 2 नवंबर की दोपहर 01:11 से 03:23 बजे तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि यासार समात होने का समय दोपहर 12:55 बजे है।

वहीं गौण देवस्थान एकादशी व्रत 2 नवंबर को होगा और पारण का समय 3 नवंबर की सुबह 06:34 से 08:46 बजे तक रहेगा। देव उठनी एकादशी कैसे मनाई जाती है? इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प के आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाई जाती है और एक ओखली में गैस से बित्र बनाकर फल, सिंघाड़ा, मिठाई, बेर और गना रखकर ढक दिया जाता है। गत के समय भगवान विष्णु और सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घर के बाहर दीपक जलाए जाते हैं और शंख, घंटा- घड़ियाल बजाकर भगवान को उठाया जाता है।

बह मुहूर्त के लिए लंबार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पर तुलसी विवाह का महत्व देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन गुलामी के पौधे का विवाह भगवान शालिग्राम में कराया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपत्तियों की संतान नहीं होती, उन्हें जीवन में एक बार तुलसी विवाह अवश्य करना चाहिए ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। छत्तीसगढ़ समेत कई जगहों पर इस दिन गांव गांव में दीपोत्सव जैसा माहौल रहता है। लोग अपने घरों के बाहर दीये जलाते हैं और भगवान विष्णु को भक्ति भाव से जगाते हैं।