राजनांदगांव: वनांचल में बच्चों के मसीहा बने डॉ. मुकेश कुमार साहू, 12 वर्षीय बच्ची की दोनों आँखों में लौटा उजियारा…

बच्चों के मसीहा बने डॉ. मुकेश कुमार साहू

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राजनांदगांव। कलेक्टर जिला राजनांदगांव जितेंद्र यादव और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न के आदेशानुसार पूरे जिले में शालेय नेत्र स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासकीय मिडिल स्कूल 6वीं 7वीं 8वीं कक्षा के प्रत्येक बच्चे की आंख जांच, चश्मा जांच और उनका उचित उपचार करना है। जिले के विकासखंड छुरिया में यह कार्यक्रम ब्लाक मेडिकल ऑफिसर डॉ. उमेश भगत एवं ब्लॉक नोडल अधिकारी डॉ. विजय मेश्राम के मार्गदर्शन में चलाया गया। एक बड़ी जिम्मेदारी देते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गैंदाटोला और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बूचाटोला के शासकीय मिडिल स्कूल की जिम्मेदारी डॉ.मुकेश कुमार साहू नेत्र सहायक अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गैंदाटोला को मिला। 21 मिडिल स्कूल के लगभग 2000 बच्चों की आँख जांच करने का लक्ष्य मिला।

12 वर्ष के बच्चे की दोनों आँखों में मिला मोतियाबिंद
प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी स्कूली बच्चों का जांच कर। 53 बच्चों में दृष्टिदोष की पहचान कर। उन्हें नि:शुल्क चश्मा वितरण किया गया है। शालेय नेत्र स्वास्थ्य परीक्षण शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अलीवारा(छुरिया) में एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने पुरे सिस्टम के होश उड़ा दिया। मामला है नन्ही बच्ची कशिश पिता मुकेश कंवर 12 वर्ष 7वीं कक्षा की है। आंख जांच के दौरान दोनों आंख से बच्ची को पढ़ने देखने में असुविधा हो रही थी। बायीं आंख से 1 मीटर और दायीं आंख से 2 मीटर उंगली को गिरने में असमर्थ थी। पूरी जांच होने के बाद पता चला कि कशिश की दोनों आंखों में मोतियाबिंद है। जब छात्रा और उनके परिवार को इनकी जानकारी देते हुए पूछा गया तो, उनके द्वारा कहा गया की हम लोग इनका बहुत इलाज कराये है। इलाज कराकर थक-हार गए है। आसपास के डॉक्टर से इनका इलाज कराए हैं। पर कुछ नहीं हुआ और इनका इलाज संभव नहीं है।

टीमवर्क और टीम को लीड करते हुए सफलता हासिल किया
डॉ. मुकेश कुमार साहू ने बात की गंभीरता को देखते हुए पूरा बीड़ा खुद ही उठाया और टीम बनाकर, टीम को नेतृत्व करते हुए। बच्चों के माता को समझाइए देते हुए। उन्हें बताया कि आप लोग अभी तक जानकारी के अभाव में इनका उचित उपचार नहीं कराए हैं। और अभी तक सरकारी अस्पताल नहीं गए हो। यह उपचार द्वारा पूरी तरह से ठीक हो सकती है। बच्ची फिर से दुनियाँ देख सकती है। शासन द्वारा इनका पूरा उपचार नि:शुल्क किया जाएगा। आपको एक पैसे भी खर्च करने की जरूरत नहीं है। शासकीय अस्पताल में बच्चे का पूरा इलाज किया जाएगा। काफी समझाइए के बाद अभिभावक इलाज के लिये तैयार हुए। ऑपरेशन के लिए तैयार करने में शासकीय मिडिल स्कूल अलीवारा के सभी शिक्षक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बूचाटोला के प्रभारी डॉ.दिग्विजय शर्मा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गैंदाटोला के प्रभारी डॉ.मनीषा बैस, आयुष्मान आरोग्य मंदिर जयसिंगटोला के सभी स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।

मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल राजनांदगांव में हुआ बच्चे का ऑपरेशन
नन्ही परी कशिश को 3 दिसंबर को शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल पेंड्री राजनांदगांव में जांच कराया गया और 4 दिसंबर को एडमिट किया गया। जहां सभी जांच करने की उपरांत 5 दिसंबर को दायीं आँख की मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया गया। सूचना मिलने तक छोटी बच्ची कशिश पूरी तरह ठीक है। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। 8 दिसंबर को अस्पताल से छुट्टी होकर सकुशल घर वापसी हुआ है। माता-पिता, परिवार, गांव और क्षेत्र के लोग डॉ. मुकेश कुमार साहू नेत्र सहायक अधिकारी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।


चॉकलेट वाले डॉक्टर की लोकप्रियता शिखर पर
वनांचल में हर तरफ उनके काम के चर्चे हैं। क्षेत्र में स्कूली बच्चों के ऑपरेशन का ये तीसरा मामला है। स्वास्थ्य विभाग ने इस बार टीमवर्क करते हुए बहुत अच्छा कार्य किया है। क्योंकि जिस स्कूल,ग्राम आलीवारा से बच्चे को ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। वह डॉ. मुकेश कुमार साहू के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। फिर भी उन्होंने इस दायित्व का निर्वाह किया। जो कि उसके निष्ठा, बच्चों के प्रति प्रेम,सेवाभाव और कार्य के प्रति समर्पण को प्रकट करता है। स्वास्थ्य विभाग राजनांदगांव से नेत्र चिकित्सा एवं सेवा के क्षेत्र में असली हीरा बनकर उभरे है। जिनकी चमक लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 3 सालों से लगातार स्कूली बच्चों का मोतियाबिंद ऑपरेशन करा कर जिले के नंबर वन नेत्र सहायक अधिकारी बन गए है। शालेय नेत्र स्वास्थ्य परीक्षण में त्वरित कार्यवाही करने, तेज और सटीक उपचार के लिए जाने जाते हैं। ज्ञात हो की जिले में लोग इन्हें चॉकलेट वाले डॉक्टर के नाम से भी जानते हैं। क्योंकि यह अपने ओपीडी में प्रत्येक मरीज को पहले चॉकलेट खिलाते हैं। फिर उनका जाँच और उपचार करते हैं। लोगों को इनका यह तरीका बहुत भाता है। इनके ओपीडी में मरीजों की भीड़ हमेशा देखी जा सकती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-गैंदाटोला नेत्र सहायक अधिकारी मुकेश कुमार साहू ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में मैं बहुत संवेदनशील हूँ। जितनी जल्दी हो सके सही और उचित उपचार हो,यही मेरी प्राथमिकता रहती है। कशिश की एक आँख का मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ है। दूसरी आँख का भी ऑपरेशन समय पर कराया जायेगा।