राजनांदगांव: दिग्विजय कॉलेज बना नई शिक्षा नीति की प्रयोगशाला, भाजपा सरकार छात्रों के साथ कर रही भेदभाव, अन्याय और धोखा : ऋषि शास्त्री …

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) प्रवेश प्रक्रिया को लेकर नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) पर विवाद गहराता जा रहा है।

पूर्व पार्षद एवं छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं सचिव ऋषि शास्त्री ने कहा कि यह पूरी अव्यवस्था सीधे-सीधे भाजपा सरकार की विफलता का परिणाम है। सरकार ने बिना स्पष्ट नियम और तैयारी के नई शिक्षा नीति लागू कर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।


ऋषि शास्त्री ने कहा कि 27 जुलाई 2026 को महाविद्यालय द्वारा जारी सूचना में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि स्नातकोत्तर प्रवेश उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार किया जाएगा और निर्देश प्राप्त होने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।

लेकिन आज तक एक वर्षीय पीजी, सातवें एवं आठवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों की पात्रता और प्रवेश प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई, फिर भी प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा रही है। इसके लिए पूरी तरह भाजपा सरकार और उच्च शिक्षा विभाग जिम्मेदार हैं।


उन्होंने कहा कि चार वर्षीय ऑनर्स एवं रिसर्च पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों को एक वर्षीय पीजी का लाभ मिलने का आश्वासन देकर अतिरिक्त एक वर्ष पढ़ाया गया, लेकिन अब उन्हीं विद्यार्थियों को दो वर्षीय पीजी में प्रवेश लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह छात्रों के साथ भेदभाव, अन्याय और धोखा है।


शास्त्री ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि यदि चार वर्षीय ऑनर्स एवं रिसर्च के बाद भी दो वर्षीय पीजी ही कराना था, तो अतिरिक्त एक वर्ष की पढ़ाई क्यों कराई गई? क्या सरकार ने बिना तैयारी के नई शिक्षा नीति लागू कर छात्रों को प्रयोगशाला का विषय बना दिया?


उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत विफलता का खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया में लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है और हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी भाजपा सरकार को स्वीकार करनी चाहिए।


ऋषि शास्त्री ने मांग की कि भाजपा सरकार तत्काल एक वर्षीय पीजी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, सातवें एवं आठवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों की स्थिति स्पष्ट करे तथा किसी भी विद्यार्थी के शैक्षणिक अधिकारों से खिलवाड़ न होने दे।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो छात्र-छात्राएं लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करेंगे। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए भाजपा सरकार को जवाब देना ही होगा।