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डीप डिप्रेशन का असर: राजनांदगांव में बारिश की संभावना, विसर्जन झांकी को लेकर श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता…

राजनांदगांव। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र (डीप डिप्रेशन) का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी दिखाई देने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है।

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ऐसे में राजनांदगांव में 25 सितंबर को बारिश की संभावना ने गणेश विसर्जन झांकी को लेकर श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से बना डीप डिप्रेशन 24 सितंबर को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और उससे लगे दक्षिण ओडिशा क्षेत्र में सक्रिय रहा।

यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर होकर डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। IMD के बुलेटिन में इसके प्रभाव से संबंधित क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनने की जानकारी दी गई है।

छत्तीसगढ़ में 27 सितंबर तक बारिश का असर

IMD के छत्तीसगढ़ के लिए जारी चेतावनी के मुताबिक 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। 25 और 26 सितंबर को भी बहुत भारी बारिश तथा 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

विसर्जन झांकी पर मौसम की नजर

राजनांदगांव में गणेशोत्सव के समापन पर निकलने वाली विसर्जन झांकी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। झांकी देखने के लिए राजनांदगांव ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश की संभावना के बीच श्रद्धालु मौसम को लेकर असमंजस में हैं। बारिश होने पर झांकी के आयोजन, श्रद्धालुओं की आवाजाही और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

शहर में झांकी को लेकर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। अब सभी की नजर मौसम के मिजाज पर टिकी है। यदि बारिश होती है तो श्रद्धालुओं को आयोजन स्थल पर सावधानी बरतने तथा प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।

मौसम विभाग की चेतावनी के बीच प्रशासन और आयोजकों के सामने चुनौती

डीप डिप्रेशन के प्रभाव से प्रदेश में बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहने की संभावना को देखते हुए विसर्जन झांकी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से तेज हवा, बिजली चमकने और अचानक बारिश की स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।

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