
राजनांदगांव। कृषि, संस्कृति, परंपरा से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व पोला श्रद्धा, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। किसान अपने कृषि कार्य में भूमिका निभाने वाले बैलों को सजा-संवारकर पूजा-अर्चना करेंगे। पर्व को लेकर बाजार में मिट्टी व लकड़ी के बने बैल सहित अन्य खिलौनों की दुकानें सज चुकी है। जिसकी खरीदी भी शुरू कर दी गई है।

भादो माह लगते ही तीज त्यौहारों का लगातार क्रम बना हुआ है। 10 सितंबर को इस पर्व को मनाए जाने की अंचल में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई है। शहर सहित ग्रामीण इलाकों में समीप पर्व को देखते हुए मिट्टी व लकड़ी से बने बैल सहित मिट्टी के बने अन्य खिलौनों की बाजार सज चुकी है। कई व्यापारी शहर व गांव-गांव में घूम-घूमकर भी चलित दुकान लगाकर बिक्री कर रहे हैं। शहर के जयस्तंभ चौक, जूनीहटरी, महावीर चौक से जयस्तंभ चौक, गुडाखू लाइन सहित अन्य प्रमुख चौक-चौराहों के पास दुकानें सजी हुई है। जिसकी खरीदी भी लोगों ने शुरू कर दी है। पोला केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि किसानों और पशुधन के बीच आत्मीय संबंध को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण लोक पर्व है। खेती-किसानी में बैलों के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से मनाया जाने वाला यह पर्व ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
शहर सहित ग्रामीण इलाकों में पोला पर्व के अवसर पर विविध खेल व सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे। वहीं पारंपरिक रूप से होने वाले बैल दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा। शहर के गंज चौक, लखोली, चिखली क्षेत्र में पूर्व से ही आयोजन होते आया है। इस वर्ष भी बैल दौड़ का आयोजन किए जाने की व्यापक तैयारियां की जा रही है। इधर समीप तीज पर्व को लेकर भी उत्साह है। जिसके चलते अभी से यात्री वाहनों में भीड़ की स्थिति निर्मित होने लगी है। पर्व के लिए लोगों का आवागमन बढ़ने लगा है।
पोला पर्व के लिए बच्चे व उनके परिजनों में खासा उत्साह है। बाजार में मिट्टी से बने छोटे-छोटे बैलों की मांग अधिक बनी हुई है। घरों में इनकी पूजा करने के पश्चात पारंपरिक रूप से बच्चे मिट्टी के बैल व अन्य खिलौनो को खेलकर पर्व की खुशियां मनाएंगे। घर-घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाएंगे।











































