
“2025 तक ‘टीबी मुक्त भारत’ का लक्ष्य फेल? जमीनी हकीकत चिंताजनक फिर खर्च की तैयारी,”
राजनांदगांव। युवा नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने कहा कि देशभर में “प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान” संचालित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत केंद्र एवं राज्य सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले में भी इस अभियान के अंतर्गत प्रतिवर्ष बड़ी राशि खर्च की जाती है। जिला चिकित्सालय द्वारा लगभग 100 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में मरीजों की खोज, जांच, निःशुल्क उपचार, दवा वितरण, पोषण सहायता एवं जन-जागरूकता जैसे कार्य किए जाते हैं, इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं।
ऋषि शास्त्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार “टीबी मुक्त भारत” का नारा तो दे रही है, लेकिन वास्तविकता में मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति सरकार की नाकामी को उजागर करती है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष शहरी क्षेत्र में कई लोगों की टीबी से मृत्यु ककी बात सामने आती है साथ ही श्रमिक क्षेत्र में टीबी का प्रकोप अधिक है जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया और 2025 तक “टीबी मुक्त भारत” का लक्ष्य भी अधूरा रह गया। जबकि वर्तमान में भी अभियान को आगे बढ़ा कर एक माह पूरा होने को है, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई उल्लेखनीय सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में 2030 तक टीबी मुक्त विश्व का लक्ष्य भी सवालों के घेरे में है।
श्री शास्त्री ने कहा कि इस अभियान की सफलता विशेषज्ञ डॉक्टरों पर निर्भर करती है, लेकिन राजनांदगांव जिला अस्पताल में टीबी विशेषज्ञ डॉक्टर का अभाव है। तीन बार के मुख्यमंत्री रहे एवं वर्तमान विधायक डॉ. रमन सिंह के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है, जिससे गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सरकार केवल दिखावा कर रही है। फील्ड स्तर पर मॉनिटरिंग और जवाबदेही का अभाव है, दवाइयों की अनियमित आपूर्ति एवं जांच सुविधाओं की कमी के कारण यह अभियान कमजोर पड़ रहा है।
अंत में ऋषि शास्त्री ने मांग की कि जिला अस्पताल में तत्काल टीबी विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति की जाए, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधार नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर जन आंदोलन करेगी।
उन्होंने कहा कि “टीबी मुक्त भारत” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है, और इसे केवल कागजों तक सीमित रखना जनता के साथ अन्याय है।










































