राजनांदगांव: कुपोषित बच्चों के जीवन में परिवर्तन लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता – कलेक्टर…

कलेक्टर ने दो अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की देखभाल की स्वयं जिम्मेदारी ली

अतिगंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती एवं नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं एनआरएलएम की ली संयुक्त बैठक

राजनांदगांव 08 अप्रैल 2026। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं एनआरएलएम की संयुक्त बैठक ली। कलेक्टर  ने गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण, पो_ लईका पहल अभियान, गर्भवती माताओं का पंजीयन, वैक्सीनेशन सहित सभी योजनाओं की समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि कुपोषित बच्चों के जीवन में परिवर्तन लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कलेक्टर ने जिले में कुपोषण उन्मूलन की दिशा में संवेदनशील पहल करते हुए दो अति गंभीर कुपोषित बच्चों की संपूर्ण देखभाल एवं उपचार की जिम्मेदारी स्वयं ली है। उन्होंने अतिगंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाए तथा उनका नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। 

कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित होता है, इसलिए सभी अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ अपने दायित्वों का निर्वहन समयबद्ध और प्रभावी तरीके से करें। उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को कुपोषण-मुक्त बनाने हेतु कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। इसके लिए जनसहभागिता से सुपोषण के प्रति जागरूकता लाने के लिए कहा। कलेक्टर ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 

कलेक्टर ने कहा कि एक अच्छी आदत कई सकारात्मक आदतों को जन्म देती है, इसलिए  महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण एवं योग जैसी गतिविधियों से जोडऩा अत्यंत आवश्यक है। कलेक्टर ने कहा कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को नियमित योग, बीपी व शुगर की जांच तथा पोषण संबंधी परामर्श से अत्यधिक लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रत्येक बुधवार को योग एवं स्वास्थ्य परीक्षण की गतिविधि संचालित की जा रही है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे महिलाओं को अधिक से अधिक शामिल होने के लिए प्रेरित करें। 

कलेक्टर ने बताया कि जिले में नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक गलत तरीके से दूध पिलाना और डकार न दिलाना भी पाया गया है। उन्होंने कहा कि माताओं को सही तरीकों से शिशु की देखभाल, स्तनपान, डकाल की तकनीक और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारों की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आंगनबाड़ी केन्द्रों में छोटी-छोटी प्रदर्शन गतिविधियां, वीडियो और मॉडल के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। 

उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, उन्हें स्थानीय स्तर पर सम्मानित कर सकते हैं। बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनआर नवरतन, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती गुरूप्रीत कौर सहित महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।