राजनांदगांव: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की जीत, अब टंक राम वर्मा भी लें नैतिक जिम्मेदारी : ऋषि शास्त्री…

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की जीत, अब टंक राम वर्मा भी लें नैतिक जिम्मेदारी : ऋषि शास्त्री

राजनांदगांव। युवा नेता, पूर्व पार्षद एवं दल प्रवक्ता ऋषि शास्त्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की एकजुटता, जनदबाव और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज का परिणाम है।


ऋषि शास्त्री ने कहा कि अब छत्तीसगढ़ सरकार को भी प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम अब तक लागू नहीं किया गया है। इसके कारण प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ “नीति नहीं, बल्कि राजनीति” कर रही है।


उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग की निर्णयहीनता और सरकार की उदासीनता के कारण हजारों विद्यार्थी असमंजस की स्थिति में हैं। प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने के बावजूद सरकार एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले सकी है। उन्होंने मांग की कि विद्यार्थियों के हित में तत्काल एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू किया जाए।


ऋषि शास्त्री ने कहा कि जब उच्च शिक्षा विभाग समय पर निर्णय लेने में विफल रहा है, तब इसकी नैतिक जिम्मेदारी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा को लेनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नैतिकता के आधार पर टंक राम वर्मा अपने पद से इस्तीफा दें और सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय ले।


उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू नहीं करती है, तो छात्र-युवा आंदोलन को पूरे प्रदेश में और व्यापक एवं तेज किया जाएगा। छात्र हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।। युवा नेता, पूर्व पार्षद एवं दल प्रवक्ता ऋषि शास्त्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की एकजुटता, जनदबाव और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज का परिणाम है।


ऋषि शास्त्री ने कहा कि अब छत्तीसगढ़ सरकार को भी प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम अब तक लागू नहीं किया गया है। इसके कारण प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ “नीति नहीं, बल्कि राजनीति” कर रही है।


उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग की निर्णयहीनता और सरकार की उदासीनता के कारण हजारों विद्यार्थी असमंजस की स्थिति में हैं। प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने के बावजूद सरकार एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले सकी है। उन्होंने मांग की कि विद्यार्थियों के हित में तत्काल एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू किया जाए।


ऋषि शास्त्री ने कहा कि जब उच्च शिक्षा विभाग समय पर निर्णय लेने में विफल रहा है, तब इसकी नैतिक जिम्मेदारी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा को लेनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नैतिकता के आधार पर टंक राम वर्मा अपने पद से इस्तीफा दें और सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय ले।


उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू नहीं करती है, तो छात्र-युवा आंदोलन को पूरे प्रदेश में और व्यापक एवं तेज किया जाएगा। छात्र हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।