राजनांदगांव: नई शिक्षा नीति पर छात्रों का हस्ताक्षर अभियान, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से पूछे सवाल…

“हम सपने देख रहे हैं, पर सिस्टम सो रहा है” — छात्रों का सरकार पर निशाना, 31 जुलाई को प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

राजनांदगांव। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर (वन ईयर पीजी) की गाइडलाइन जारी नहीं होने के विरोध में सोमवार को शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा से तत्काल स्पष्ट गाइडलाइन जारी करने की मांग की।


प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने “हम सपने देख रहे हैं, पर सिस्टम सो रहा है” के नारे लगाए और कहा कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी प्रदेश सरकार एक वर्षीय पीजी को लेकर निर्णय नहीं ले पा रही है।

यूजीसी के प्रावधानों के बावजूद दिशा-निर्देश जारी नहीं होने से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अनिश्चितता में है और उनका एक शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।


इस अवसर पर युवा नेता, पूर्व पार्षद एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋषि शास्त्री ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ प्रयोग करना बंद करे।

नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी का स्पष्ट प्रावधान है, फिर भी छत्तीसगढ़ में इसे लागू करने में हो रही देरी समझ से परे है।

उन्होंने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि यदि समय पर गाइडलाइन जारी नहीं होती है तो छात्रों के बर्बाद होने वाले शैक्षणिक वर्ष की जिम्मेदारी कौन लेगा?


ऋषि शास्त्री ने कहा कि “हम सपने देख रहे हैं, पर सिस्टम सो रहा है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों की वास्तविक पीड़ा है। सरकार को राजनीति छोड़कर विद्यार्थियों के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और तत्काल प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिए।


कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विद्यार्थियों ने कहा कि डॉ. कलाम ने युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी थी और उन सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा व्यवस्था की भी है।


एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव राजा यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी ऑटोनॉमस महाविद्यालयों में चार वर्ष पहले नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया गया था और विद्यार्थियों को एक वर्षीय पीजी का भरोसा दिया गया था।

अब उन्हीं विद्यार्थियों को दो वर्षीय पीजी करने के लिए कहना उनके साथ अन्याय है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही वन ईयर पीजी को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं करती, तो 31 जुलाई को प्रदेशभर में उच्च शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।