
निकाय क्षेत्र के अधिक से अधिक घरों में सोलर पेनल लगाने प्रशासन सक्रिय
आंगनबाडी उन्नयन एवं बाडी विकास की संभावनाओ पर हुई चर्चा
राजनांदगांव 29 जुलाई। राजनांदगांव जिले के ग्रामीण व निकाय क्षेत्र में केन्द्र सरकार की महत्वकाक्षी योजना प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ देने सोलर पेनल लगाने शासकीय सहित निजी संस्थाओं को प्रेरित किया जा रहा है। जनमानस को योजना का लाभ लेने प्रेरित करने की कडी में आज निगम सभागृह में आंगनबाडी कार्यकर्ताओ की बैठक लेकर निगम आयुक्त श्री जी.आर. मरकाम ने योजना की विस्तृत जानकारी देकर सोलर पेनल लगाकर लाभ लेने की अपील की। साथ ही उन्होंने निगम सीमाक्षेत्र के आंगनबाडी उन्नयन तथा बाडी विकास के लिए विस्तार से चर्चा किए।
बैठक मे आयुक्त श्री मरकाम ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के संबंध मंे जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना बिजली के बिल से मुक्ति दिलाने तथा ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रभावशाली माध्यम है। योजनांतर्गत सोलर पेनल लगाना, अपने घर की छत पर ही ऊर्जा का उत्पादन करने का ससक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव निकाय क्षेत्र सहित जिले में अधिक से अधिक लोगो को योजना का लाभ देने सोलर पेनल लगाने प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि तीन किलो वाट का सोलर पेनल घर में लगाने से प्रतिदिन 12 यूनिट बिजली पैदा होती है, इसको लगाने से बिजली बिल शुन्य हो जाता है। उन्हांेने कहा कि आंगनबाडी कार्यकर्ताओं का मानदेय कम है जिसके आधार पर इसे लगाने में आर्थिक कठिनाई आ सकती है, इसके निदान के लिए बैंक से लोन देने का भी प्रावधान है, इसमे केन्द्र व राज्य सरकार से सब्सिडी भी मिलती है। उन्होंने सभी आगनबाडी कार्यकर्ताओं से सोलर पेनल लगाकर बिजली बिल शुन्य कर आर्थिक लाभ उठाने की अपील की। बैठक मंे सोलर पेनल लगाने वाली कार्यकर्ताओ ने अपना अनुभव साझा कर बिजली बिल शुन्य होने की जानकारी दी।
बैठक मेें आयुक्त श्री मरकाम ने आगनबाडी केन्द्रो के उन्नयन के लिए भी चर्चा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निकाय क्षेत्र में लगभग 156 आंगनबाडी केन्द्र है। जिसमें से कुछ केन्द्र निजी संस्था में भी संचालित है। स्वयं के भवन वाली आंगनबाडी केन्द्र जहाॅ मरम्मत की आवश्यकता है, उसका उन्नयन करने प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाडी अपने मोहल्ले में ही प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। जिसका नवाचार के तहत जीर्णोद्धार करने का प्रयास किया जा रहा है। आंगनबाडी में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओ के लिए पोषण आहार के अलावा छोटे बच्चो की देखभाल तथा उनकी प्रारंभिक शिक्षा कार्यकर्ताओ व सहायिकाओ द्वारा दी जाती है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओ का सीधा लाभ देने के अलावा योजनाओ को जनजन तक पहुचाने का कार्य आप लोग करते है। एसआईआर में आप लोगो की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसे ध्यान मंे रखकर आंगनबाडी केन्द्रो का उन्नयन करना है, केन्द्र का मरम्मत कर आधुनिक स्वरूप देने कहा प्रयास है, साथ ही फलदार पौधे लगाकर पोषण आहार में सहायता पहुचाने की भी मंशा है।
आयुक्त ने कहा कि इसी प्रकार बाडी विकास के तहत शहर के ग्रामीण वार्डो के बाडी या घर की रिक्त भूमि में बाडी लगाने का भी विचार किया जा रहा है, जहाॅ विभिन्न प्रजाति के पौधो में बेल, केला, नीबू, पपीता, आम, गुलहड, कटहल एवं मूनगा के पौधे रोपित किये जायेगे, जिससे बाडी विकसित हो सके। इसके लिए आप सबका सहयोग की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि नवाचार के तहत किया जाने वाला यह कार्य पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कारगर साबित होगा।
कार्यपालन अभियंता श्री दीपक खाण्डे ने कहा कि केन्द्र सरकार की आवासहिनो के लिए एक महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना है, जिसका भी आंगनबाडी कार्यकर्ता एंव सहायिका लाभ उठा सकते है। उन्होंने कहा कि किराये के मकान में निवासरत परिवार योजनांतर्गत कम लागत में बहुमंजिला सर्वसुविधायुक्त मकान लेकर स्वयं के आवास का सपना सकार कर सकते है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी श्रीमती सरस्वती चंद्रवंशी ने कहा कि आयुक्त महोदय के इन तीनो पहल के लिए हम उनका धन्यवाद देते है। बिजली बिल से छुटकारा पाने का सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी प्रकार आंगनबाडी का उन्नयन कर आधुनिक स्वरूप देने से राजनांदगांव की पहचान बनेगी। साथ ही बाडी विकास की पहल भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छी सोच है। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में मैं आगनबाडी कार्यकर्ताओ से अपील करती हूॅ कि वे प्लास्टिक थैले का उपयोग छोड कपड़े के थैले का उपयोग करे और अपने केन्द्र में भी महिलाओ को प्रेरित करे। प्लास्टिक का उपयोग नही करने संकल्प लेकर पर्यावरण संरक्षण में पहला कदम बढ़ाए। बैठक में शहर की सुपरवाईजर एंव आगनबाडी कार्यकर्ता उपस्थित थी।










































