
रायपुर। नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले बैच के हजारों विद्यार्थी अब एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां उनकी आगे की पढ़ाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट नीति जारी नहीं की गई है। नतीजतन, हजारों छात्र-छात्राएं असमंजस और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप अधिक लचीला और शोध आधारित विकल्प उपलब्ध कराना था। इसी मॉडल में चार वर्षीय स्नातक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी का प्रावधान भी रखा गया है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इस व्यवस्था के पहले बैच के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनका पीजी प्रवेश कब और कैसे होगा।
विद्यार्थियों का कहना है कि जब उन्होंने चार वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था, तब उन्हें बताया गया था कि सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सीधे एक वर्षीय पीजी में प्रवेश के पात्र होंगे। इसी भरोसे पर उन्होंने अतिरिक्त एक वर्ष की पढ़ाई पूरी की। अब प्रवेश प्रक्रिया और पात्रता संबंधी दिशा-निर्देश जारी नहीं होने से उनका पूरा शैक्षणिक रोडमैप प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
उच्च शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो हजारों विद्यार्थियों का एक पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है।
उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी प्रवेश प्रक्रिया, सीटों की उपलब्धता और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि इन पहलुओं पर समय रहते स्पष्टता नहीं दी गई, तो नीति के पहले बैच के विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
प्रदेश के अग्रणी महाविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट तथा छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सचिव ऋषि शास्त्री का कहना है कि सरकार नई शिक्षा नीति लागू होने का दावा तो कर रही है, लेकिन चार वर्षीय स्नातक पूरा कर चुके विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी प्रवेश नीति अब तक स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने मांग की कि सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने वाले सभी पात्र विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी में समान, पारदर्शी और समयबद्ध प्रवेश व्यवस्था तत्काल लागू की जाए, ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।
अब प्रदेशभर के विद्यार्थियों की नजर राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों के अगले फैसले पर टिकी है। सवाल केवल प्रवेश प्रक्रिया का नहीं, बल्कि नई शिक्षा नीति के पहले बैच के भविष्य और उस भरोसे का भी है, जिसके आधार पर विद्यार्थियों ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को चुना था।










































