back to top

राजनांदगांव : मशहूर शायर अज़हर इक़बाल ने रुपेश देवांगन की किताब अजनबी की तारिफ करते नही थके…


राजनांदगांव – भोपाल में चल रहे विश्व रंग 2022 के दौरान वहां पर मुशायरा का कार्यक्रम रखा गया था जिसमे बहुत से शायर सामिल हुए और इसी बीच हिंदुस्तान के मशहूर शायरों में से एक जनाब मोहम्मद अजहर इकबाल साहब भी उपास्थि थे और उन्होंने रुपेश देवांगन द्वारा लिखी किताब “अजनबी” एक अनसुनी कहानी को पढ़ने के बाद सभी लोगों से इस किताब को पढ़ने और खरीदने की अपील की उन्होंने उस किताब को पढ़ने के बाद लोगों को यह बताया की ऐसी युवा सोच, इतनी सुंदर कहानी बहुत ही कम सुनने और पढ़ने को मिलता है।

Advertisements

यह किताब लेखन के क्षेत्र मे एक नया आयाम को जन्म देती है इस किताब की कहानी जब शुरू होती है जब हम इसे पढ़ना प्रारंभ करते हैं तब से अंत तक पाठकों को जुड़ें रखती है इस किताब में सबसे अच्छी बात यह लगी की कितने संघर्षों के बाद भी उसमें का एक किरदार कभी टूटा नहीं हौसलो के साथ आगे बढ़ता रहा और जो पाना चाहता था वो पाया, पर वही पर इस किताब की दुसरी किरदार अपनों के ही गलतफहमी का शिकार हो गई फिर भी उस लड़के ने अपने प्यार का साथ नही छोड़ा और दूर होकर भी साथ निभाता हुआ नजर आता है ।

सच मे आज कल कुछ ऐसे लोग भी है जो अपनो के खुशियों के लिए अपने खुशियों को धुमील कर लेते है अपने लोगो को बिना बताये दिल मे एक दर्द लेकर भी अपनो के लिए हस्ते हुए जीते है लेकिन फिर भी कुछ अपने ही गलत कर सही होने का दिखावा करते है और हम सच को जाने बिना फैसला कर लेते है और खुद अपने दर्द का कारण बनते है ।इस किताब की कहानी हमारे अपने शहर, गली, मोहल्ले के इर्द-गिर्द घूमते हुए एक खाखा खीचते नजर आती है और ऐसा महसूस होता है

कि इस किताब के किरदार में हम खुद को पाते है और खुद को महसूस करते हैं जितने भी लोग इस किताब को पड़े हैं या पड़ेंगे मैं वादा करता हूं कि इस किताब में खुद को ही पाएंगे। लिखने की शैली, कहानी और कहानी को तैयार करने की प्लेटफार्म बहुत ही सुंदर और सुसज्जित है और इस अजनबी की कहानी मे लड़के के साथ इतना कुछ होते हुए भी उसने लड़की को गलत नही कहा और नारी का सम्मान रखा।

एक नारी को बदनामी से बचाने के लिए खुद को ही बुरा बना लिया लेकिन सच को जाने बिना कोई भी फैसला लेना एक दिन तकलिफ देती है और इस कहानी मे भी एक किरदार को अपनो के गल्तियों के नाम से जिन्दगी भर रोना पड़ा और धन्य है ऐसे लोग जो आज भी गलत और जादू टोना जैसे फालतू कार्य करवाते है, एक सच्चे रिस्ते मे होने वाले लोगो को अलग कर देते है। इस अजनबी की कहानी आज के परिवेश मे बहुत ही सुन्दर और सटिक है और साथ ही इसमे इस्तमाल किया किया गया किरदार और चित्रित करने का तरीका दिल की गहराई को बहुत ही अन्दर तक छूती है । इस कहानी को पड़ते समय ऐसा महसूस होता है की मानो यह सब हमारे साथ हो रहा हो ।


मैं अजहर इकबाल खान आने वाले भविष्य के लिए हमारे युवा लेखक रुपेश देवांगन जी अनंत शुभकामनाएं देता हूं और सदैव दुआ करूंगा की वह हमेशा तरक्की करे और हिन्दूस्तान के सहित्य मे इनका नाम भी ऊंचाइयों तक पहुचे क्योकी रुपेश देवांगन जी ने एक छोटी सी उम्र मे भी एक सुंदर कहानी की रचना किया है और इसमे बहुत ही सुन्दर तरीके से शब्दो का सही इस्तेमाल किया गया है । ऐसे कला और रचना में कभी उम्र नहीं देखना चाहिये पर रूपेश ने साबित कर दिया की कला और साहित्य उम्र का मोहताज नहीं होता है । आइए हम सब मिलकर हिन्दी की सेवा करने वाले ऐसे तमाम लोगों को उत्साहित करें और साहित्य लेखन के क्षेत्र को आगे बढ़ाएं।

Advertisements

You cannot copy content of this page