
मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग को बनाया जा सकता है, वेयर हाउस या एफसीआई गोदाम ..
राजनांदगाँव – सँस्कारधानी शहर की पहचान हॉकी, झांकी के अलावा मेडिकल कॉलेज हुआ करती थी, अब सब धीरे-धीरे खत्म होते जा रहा है, हॉकी तो खत्म हो गई, कुछ सालों में झांकी भी खत्म हो जाएगी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि ,कुछ ही वर्षो में संस्कारधानी को मिले सौगात मेडिकल कॉलेज की, जो अब बंद होने की कगार पर है,धीरे-धीरे मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टर त्यागपत्र देकर नौकरी छोड़ रहे है, कल फिर एक डॉक्टर ने अपने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
शहर के नेता, सिर्फ बाहरी नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने तक सिमित रह गए।

मेडिकल कॉलेज के पीजी की मान्यता तो खतरे में थी ही अब एमबीबीएस की मान्यता भी खतरे में है।
क्या कर रहें है, शहर के नेता, डॉ रमन सिंह को लगातार चुनाव जितवाकर मुख्यमंत्री तक शहर की जनता ने अपना मत दिया, और आज भी उन्हें ही अपना नेता मानते है, अब वे विधानसभा अध्यक्ष हैं, पिछले 5 साल भी विपक्ष में विधायक रहते डॉ रमन सिंह ने मेडिकल कॉलेज को एमआरआई, और सीटी स्कैन मशीन नही दिलवा पाए, अब डबल इंजन की सरकार और स्वयं स्पीकर रहते मेडिकल कॉलेज के लिए क्या कर रहे है।
क्या मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह बंद होने का इंतजार कर रहे है।
गौरतलब है, की इस मेडिकल कॉलेज के रहने से आस-पास के 5 जिलों के अलावा महाराष्ट्र और एमपी के बीमार मरीजों का उपचार यहां हुआ करता था, लोग इस मेडिकल कॉलेज में काफी उम्मीद लेकर इलाज करवाने पहुंचे थे।
इस मेडिकल कॉलेज के चलते बहुत से लोगों को नौकरी और रोजगार भी मिला है।
अब सब फिर से बेरोजगार हो जायेगें।
तो क्या मतलब ऐसे नेताओं का जो यहां के रहवासियों की चिंता नही करते।
शहर के नेता तो अपने आप को वरिष्ठ बोलकर आये दिन टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में राजनीतिक बयानबाज़ी कर अपने आप को श्रेष्ठ मानते है, क्या आम जनता इन नेताओं को पसंद करेंगी।
जगह-जगह मंदिरों का निर्माण करवाकर करोड़ों अरबों रुपये खर्च रहे है, भगवान नही बोलते मेरे लिए आमजनता की कमाई मंदिरों में खर्च करों।
उसी भगवान ने इंसानों को भी बनाया है,ऐसे में क्या भगवान का अपमान नही होगा, की उनके ही द्वारा धरती पर जन्म लेने वाला इंसान इंसानों के ही काम नही आ रहें है, मेरी व्यक्तिगत आस्था, भगवान पर तो है, ही पर पहले मैं इंसानों की में सेवा कर भगवान को ढूंढता हूँ।
एक दौर कोरोना का निकल चुका है, भगवान ना करे उस प्रकार का कोई और दौर देखने मिले।









































