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राजनांदगांव: एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस के प्रति जागरूकता एवं इसकी प्रभावशीलता को आने वाली पीढियों के लिए सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी…

शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

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एंटीबायोटिक पर जागरूकता कार्यक्रम जिसे दो भागों में बांटा गया प्रथम चरण में विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न महाविद्यालय तथा विद्यालयों में इस विषय पर व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया तथा द्वितीय चरण में अंतर महाविद्यालय पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय,शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय, शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय राजनांदगांव के विद्यार्थियों ने भाग लिया ।


आज दिनाँक 25 अगस्त 2026 अंतर महाविद्यालयीन पोस्टर प्रतियोगिता शीर्षक “Handle Antibiotics with Care” का पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न हुआ ।

इस कार्यक्रम का आयोजन शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजनांदगांव के वनस्पति शास्त्र विभाग एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के साथ-साथ माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसायटी, इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग, एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस(AMR) की बढ़ती समस्या तथा इसके नियंत्रण में जन-जागरूकता की भूमिका के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक पोस्टरों के माध्यम से एंटीबायोटिक के उचित उपयोग का संदेश दिया।


इस कार्यक्रम में शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता, माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसायटी इंडिया (MBSI) के छत्तीसगढ़ राज्य के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सोनल मिश्रा , श्रीमती सविता चन्द्रवंशी (विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी), डॉ. त्रिलोक कुमार (सहायक प्राध्यापक, वनस्पतिशास्त्र विभाग), एस. आर. कन्नौजे (सहायक प्राध्यापक, प्राणी शास्त्र, शासकीय शिवनाथ साइंस कॉलेज), प्रतियोगिता के निर्णायक यूनुस रजा बेग (IQAC Cordinator), डॉ. प्रमोद महिष ( HOD, बायोटेक्नोलॉजी विभाग), डॉ. डी. के. वर्मा (सहायक प्राध्यापक) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यार्थियों द्वारा विषय से संबंधित व्याख्यान प्रस्तुत की गई, जिसमें एंटीबायोटिक के अनावश्यक एवं गलत उपयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं तथा एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस को रोकने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आशिफा अंसारी , ओम कुमार सोनी, रागिनी वर्मा, द्रोणिका सिन्हा, महेश मल्लाह, नवीन बागड़े, चांद कुमार एम.एस सी. वनस्पति और माइक्रोबायोलॉजी के विद्यार्थी द्वारा विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की गयी।


कार्यक्रम की रूपरेखा तथा उद्देश्य बताते हुए डॉ सोनल मिश्रा ने कहा कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल हमें जिम्मेदारी से करना चाहिए इनका उपयोग चिकित्सकिय सलाह के बाद निर्धारित अवधि तक ही करना चाहिए और बताया कि इनकी प्रभावशीलता को आने वाली पीढियां के लिए सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक रहने तथा इस महत्वपूर्ण संदेश को समाज तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं प्रयासों की सराहना की और उन्होंने घर में मिलने वाले मसाले तथा औषधिय पौधों से अपनी रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाने का सुझाव दिया।

इसके पश्चात प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विजेताओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी गई तथा सभी प्रतिभागियों को भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।


अंतर महाविद्यालय पोस्टर प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रेणुका साहू, दूसरे स्थान पर दिव्या शर्मा एवं तीसरे स्थान पर अनन्या स्वर्णकार और अनामिका साहू रहे।


विशेष सराहना एवं योगदान प्रमाण पत्र प्रगति नोन्हारे और श्वेता वर्मा (अतिथि व्याख्याता, माइक्रोबायोलॉजी विभाग )को प्रदान किया गया ।

कार्यक्रम के अंत में श्रीमती सविता चन्द्रवंशी द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। उन्होंने महाविद्यालय की प्राचार्य महोदया डॉ. सुचित्रा गुप्ता, डॉ. सोनल मिश्रा तथा निर्णायक मंडल, विभागीय सदस्यों, प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

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