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राजनांदगांव : फर्राटे भर रहे काले शीशे वाले वाहन, खतरे की अनदेखी…

जिले की यातायात व्यवस्था लचर है। बस हो या कार सब लोग नियम तोड़ रहे है । कोई क्षमता से ज्यादा सवारी बैठा रहा है तो कोई उटपटांग लिखावट वाले नंबरों का उपयोग कर रूतबा दिखा रहा है। हाल ये है कि लोग खुलेआम अपनी गाड़ियों में काला शीशा लगाकर बैखौफ घूम रहे हैं इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

राजनांदगांव : जिले की यातायात व्यवस्था लचर है। बस हो या कार सब लोग नियम तोड़ रहे है । कोई क्षमता से ज्यादा सवारी बैठा रहा है तो कोई उटपटांग लिखावट वाले नंबरों का उपयोग कर रूतबा दिखा रहा है। हाल ये है कि लोग खुलेआम अपनी गाड़ियों में काला शीशा लगाकर बैखौफ घूम रहे हैं इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ऐसी गाडियों में आपरधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है। पहले यह बड़े शहरो की आम बात थी। अब तो यहां आम हो गया है। यह सब देखने के बाद भी ट्रैफिक पुलिस क्यों कार्रवाई नहीं कर रही, यह समझ से परे है।

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जिले में यातायात व्यवस्था लचर है। बस हो या कार, सभी नियम तोड रहे हैं। क्षमता से ज्यादा सवारी ढोई जा रही है। कई निजी गाड़ियों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। नियमानुसार गाड़ियो में ऐसे शीशे लगे होने चाहिए कि उसमें बैठे लोगों को देखा जा सके। सामने से 70 प्रतिशत और किनारे से 50 प्रतिशत सादा होना आवश्यक है। वाहनों के शीशे पर लगने वाली ब्लैक फिल्म या स्टिकर मार्केट में आसानी से उपलब्ध है। एक कार के शीशे पर फिल्म चढ़ाने पर कम से कम 2000 हजार रुपये तक का खर्च आता है।

काले शीशे के अंदर होते हैं कई खेलः काले शीशे के अंदर काले खेल भी होते हैं। शराब पीने और अवैध रूप से लाने का भी काम आसानी से होता है । कई लोग शस्त्र को लाने-ले जाने का काम ऐसी ही गाड़ियों में करते हैं। अपराधी व तस्कर पुलिस या खुफिया तंत्र को चकमा देने के लिये काला शीशा लगे वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

गाड़ियों के शीशे पर काली फिल्म लगाना जुर्म है, ऐसे वाहनों पर यातायात विभाग के द्वारा सख्ती से कार्रवाई की जाती है। इसमें तो नियम का उल्लंघन करने पर जेल का भी प्रविधान है।

SOURCE naidunia.com

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