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राजनांदगांव: पंक्तियां जो बनी प्रेरक…

राजनांदगांव। जिला प्रशासन द्वारा यूपीएससी 2025 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा मार्गदर्शन कार्यक्रम में उन्होंने अपने अनुभवों को साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने जुनून और जज्बे को कविताओं और उध्वरण के माध्यम से भी अभिव्यक्त किया।

 जीवन में सफलता हासिल करने के लिए और आगे बढऩे के लिए हमें कभी महान व्यक्तित्व के उध्वरण एवं कवियों की कविताएं पथ प्रदर्शन करती हैं तो कभी किसी का जीवन। इसकी एक झलक कार्यक्रम में दिखाई दी, जहां चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी पसंदीदा उम्दा कविताओं एवं पंक्तियों का स्मरण किया और युवाओं का हौसला बढ़ाया।

सुप्रसिद्ध कवि श्री सोहन लाल द्विवेदी की कविता

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लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

विख्यात कवि शिव मंगल सिंह सुमन की प्रेरक कविताओं का स्मरण किया गया-

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही ।
वरदान माँगूँगा नहीं।

प्रख्यात कवि जयशंकर प्रसाद की कविता

वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों

श्रीअर्जुन सिसोदिया की कविता-

युद्ध नहीं जिनके जीवन में
वे भी बहुत अभागे होंगे
या तो प्रण को तोड़ा होगा
या फिर रण से भागे होंगे
तो किसी ने कहा डर के आगे जीत है। लक्ष्य के प्रति समपर्ण और निष्ठा के लिए जिन्हें जहां से प्रेरणा मिली, मार्गदर्शन मिला सहज भाव से आत्मसात किया।

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